Bhagavata Aarti

Aarti

1

आरती अतिपावन पुरान की । धर्म-भक्ति-विज्ञान-खान की ॥ टेक॥

2

महापुराण भागवत निर्मल । शुक-मुख-विगलित निगम-कल्प-फल ॥

3

परमानन्द सुधा-रसमय कल । लीला-रति-रस रसनिधान की ॥ आरती०

4

कलिमथ-मथनि त्रिताप-निवारिणि । जन्म-मृत्यु भव-भयहारिणी ॥

5

सेवत सतत सकल सुखकारिणि । सुमहौषधि हरि-चरित गान की ॥ आरती०

6

विषय-विलास-विमोह विनाशिनि । विमल-विराग-विवेक विकासिनि ॥

7

भगवत्-तत्त्व-रहस्य-प्रकाशिनि । परम ज्योति परमात्मज्ञान की ॥ आरती०

8

परमहंस-मुनि-मन उल्लासिनि । रसिक-हृदय-रस-रासविलासिनि ॥

9

भुक्ति-मुक्ति-रति-प्रेम सुदासिनि । कथा अकिंचन प्रिय सुजान की ॥ आरती०