Renuka Ashtakam by Vishnudas in Marathi

Ashtakam

1

श्रीगणेशाय नमः। लक्ष-कोटि-चण्डकीर्ण-सुप्रचंड विलपती। अंब चंद्रवदनबिंब दीप्तीमाजि लोपती। सिंह-शिखर-अचलवासि मूळपीठ नायिका। धर्म-अर्थ-काम-मोक्ष कल्पवृक्ष रेणुका॥

2

आकर्ण अरुणवर्ण नेत्र श्रवणीं दिव्य कुंडले। डोलताति पुष्पहार भार फार दाटले। अष्टदंडि बाजुबंदि कंकणादि मुद्रिका। धर्म-अर्थ-काम-मोक्ष कल्पवृक्ष रेणुका॥

3

इंद्रनीळ-पद्मराग-पाचहीर वेगळा। पायघोळ-बोरमाळ-चंद्रहार वेगळा। पैंजणादि भूषणेच लोपल्याति पादुका। धर्म-अर्थ-काम-मोक्ष कल्पवृक्ष रेणुका॥

4

इंद्र-चंद्र-विष्णु-ब्रह्म-नारदादि वंदिती। आदि-अन्त ठावहीन आदिशक्ति भगवती। प्रचंड चंडमुंड खंडविखंडकारि अंबिका। धर्म-अर्थ-काम-मोक्ष कल्पवृक्ष रेणुका॥

5

पर्वताग्रवासि पक्षि अंब ! अंब ! बोलती। विशाल शालवृक्ष रानीं भवानि ध्यानि डोलती। अवतार कृत्यासार जड-मुडादि तारका। धर्म-अर्थ-काम-मोक्ष कल्पवृक्ष रेणुका॥

6

अनंत ब्रह्मांड पोटि पूर्वमुखां बैसली। अनंतगुण अनंतशक्ति विश्वजननि भासली। सव्यभागि दत्त-अत्रि वामभागि कालिका। धर्म-अर्थ-काम-मोक्ष कल्पवृक्ष रेणुका॥

7

पवित्र मातृक्षेत्र धन्य वास पुण्य आश्रमीम्। अंबदर्शनास भक्त अभक्त येति आश्रमीम्। म्हणूनि विष्णुदास निजलाभ पावला फुका॥

8

धर्म-अर्थ-काम-मोक्ष कल्पवृक्ष रेणुका॥

9

श्रीरेणुकार्पणमस्तु॥