Govardhan Chalisa
Opening
Doha 1
बन्दहुँ वीणा वादिनी, धरि गणपति को ध्यान। महाशक्ति राधा सहित, कृष्ण करौ कल्याण॥
Doha 2
सुमिरन करि सब देवगण, गुरु पितु बारम्बार। बरनौ श्रीगिरिराज यश, निज मति के अनुसार॥
Chaupai
Chaupai 1
जय हो जय बंदित गिरिराजा। ब्रज मण्डल के श्री महाराजा॥
Chaupai 2
विष्णु रूप तुम हो अवतारी। सुन्दरता पै जग बलिहारी॥
Chaupai 3
स्वर्ण शिखर अति शोभा पामें। सुर मुनि गण दरशन कूं आमें॥
Chaupai 4
शांत कन्दरा स्वर्ग समाना। जहाँ तपस्वी धरते ध्याना॥
Chaupai 5
द्रोणगिरि के तुम युवराजा। भक्तन के साधौ हौ काजा॥
Chaupai 6
मुनि पुलस्त्य जी के मन भाये। जोर विनय कर तुम कूँ लाये॥
Chaupai 7
मुनिवर संघ जब ब्रज में आये। लखि ब्रजभूमि यहाँ ठहराये॥
Chaupai 8
विष्णु धाम गौलोक सुहावन। यमुना गोवर्धन वृन्दावन॥
Chaupai 9
देख देव मन में ललचाये। बास करन बहु रूप बनाये॥
Chaupai 10
कोउ बानर कोउ मृग के रूपा। कोउ वृक्ष कोउ लता स्वरूपा॥
Chaupai 11
आनन्द लें गोलोक धाम के। परम उपासक रूप नाम के॥
Chaupai 12
द्वापर अंत भये अवतारी। कृष्णचन्द्र आनन्द मुरारी॥
Chaupai 13
महिमा तुम्हरी कृष्ण बखानी। पूजा करिबे की मन ठानी॥
Chaupai 14
ब्रजवासी सब के लिये बुलाई। गोवर्द्धन पूजा करवाई॥
Chaupai 15
पूजन कूँ व्यञ्जन बनवाये। ब्रजवासी घर घर ते लाये॥
Chaupai 16
ग्वाल बाल मिलि पूजा कीनी। सहस भुजा तुमने कर लीनी॥
Chaupai 17
स्वयं प्रकट हो कृष्ण पूजा में। माँग माँग के भोजन पामें॥
Chaupai 18
लखि नर नारि मन हरषामें। जै जै जै गिरिवर गुण गामें॥
Chaupai 19
देवराज मन में रिसियाए। नष्ट करन ब्रज मेघ बुलाए॥
Chaupai 20
छाँया कर ब्रज लियौ बचाई। एकउ बूँद न नीचे आई॥
Chaupai 21
सात दिवस भई बरसा भारी। थके मेघ भारी जल धारी॥
Chaupai 22
कृष्णचन्द्र ने नख पै धारे। नमो नमो ब्रज के रखवारे॥
Chaupai 23
करि अभिमान थके सुरसाई। क्षमा माँग पुनि अस्तुति गाई॥
Chaupai 24
त्राहि माम् मैं शरण तिहारी। क्षमा करो प्रभु चूक हमारी॥
Chaupai 25
बार बार बिनती अति कीनी। सात कोस परिकम्मा दीनी॥
Chaupai 26
संग सुरभि ऐरावत लाये। हाथ जोड़ कर भेंट गहाये॥
Chaupai 27
अभय दान पा इन्द्र सिहाये। करि प्रणाम निज लोक सिधाये॥
Chaupai 28
जो यह कथा सुनैं चित लावें। अन्त समय सुरपति पद पावें॥
Chaupai 29
गोवर्द्धन है नाम तिहारौ। करते भक्तन कौ निस्तारौ॥
Chaupai 30
जो नर तुम्हरे दर्शन पावें। तिनके दुःख दूर ह्वै जावें॥
Chaupai 31
कुण्डन में जो करें आचमन। धन्य धन्य वह मानव जीवन॥
Chaupai 32
मानसी गंगा में जो न्हावें। सीधे स्वर्ग लोक कूँ जावें॥
Chaupai 33
दूध चढ़ा जो भोग लगावें। आधि व्याधि तेहि पास न आवें॥
Chaupai 34
जल फल तुलसी पत्र चढ़ावें। मन वांछित फल निश्चय पावें॥
Chaupai 35
जो नर देत दूध की धारा। भरौ रहे ताकौ भण्डारा॥
Chaupai 36
करें जागरण जो नर कोई। दुख दरिद्र भय ताहि न होई॥
Chaupai 37
'श्याम' शिलामय निज जन त्राता। भक्ति मुक्ति सरबस के दाता॥
Chaupai 38
पुत्र हीन जो तुम कूँ ध्यावें। ताकूँ पुत्र प्राप्ति ह्वै जावें॥
Chaupai 39
दंडौती परिकम्मा करहीं। ते सहजहि भवसागर तरहीं॥
Chaupai 40
कलि में तुम सम देव न दूजा। सुर नर मुनि सब करते पूजा॥
Closing
Doha 1
जो यह चालीसा पढ़ै, सुनै शुद्ध चित्त लाय। सत्य सत्य यह सत्य है, गिरिवर करै सहाय॥
Doha 2
क्षमा करहुँ अपराध मम, त्राहि माम् गिरिराज। श्याम बिहारी शरण में, गोवर्द्धन महाराज॥