Yamuna Chalisa
Opening
Doha 1
प्रियसंग क्रीड़ा करत नित, सुखनिधि वेद को सार। दरस परस ते पाप मिटे, श्रीकृष्ण प्राण आधार॥
Doha 2
यमुना पावन विमल सुजस, भक्तिसकल रस खानि। शेष महेश वदंन करत, महिमा न जाय बखानि॥
Doha 3
पूजित सुरासुर मुकुन्द प्रिया, सेवहि सकल नर-नार। प्रकटी मुक्ति हेतु जग, सेवहि उतरहि पार॥
Doha 4
बंदि चरण कर जोरी कहो, सुनियों मातु पुकार। भक्ति चरण चित्त देई के, कीजै भव ते पार॥
Chaupai
Chaupai 1
जै जै जै यमुना महारानी। जय कालिन्दि कृष्ण पटरानी॥
Chaupai 2
रूप अनूप शोभा छवि न्यारी। माधव-प्रिया ब्रज शोभा भारी॥
Chaupai 3
भुवन बसी घोर तप कीन्हा। पूर्ण मनोरथ मुरारी कीन्हा॥
Chaupai 4
निज अर्धांगी तुम्ही अपनायों। सावँरो श्याम पति प्रिय पायो॥
Chaupai 5
रूप अलौकिक अद्भूत ज्योति। नीर रेणू दमकत ज्यूँ मोती॥
Chaupai 6
सूर्यसुता श्यामल सब अंगा। कोटिचन्द्र ध्युति कान्ति अभंगा॥
Chaupai 7
आश्रय ब्रजाधिश्वर लीन्हा। गोकुल बसी शुचि भक्तन कीन्हा॥
Chaupai 8
कृष्ण नन्द घर गोकुल आयों। चरण वन्दि करि दर्शन पायों॥
Chaupai 9
सोलह श्रृंगार भुज कंकण सोहे। कोटि काम लाजहि मन मोहें॥
Chaupai 10
कृष्णवेश नथ मोती राजत। नुपूर घुंघरू चरण में बाजत॥
Chaupai 11
मणि माणक मुक्ता छवि नीकी। मोहनी रूप सब उपमा फिकी॥
Chaupai 12
मन्द चलहि प्रिय-प्रीतम प्यारी। रीझहि श्याम प्रिय प्रिया निहारी॥
Chaupai 13
मोहन बस करि हृदय विराजत। बिनु प्रीतम क्षण चैन न पावत॥
Chaupai 14
मुरलीधर जब मुरली बजावैं। संग केलि कर आनन्द पावैं॥
Chaupai 15
मोर हंस कोकिल नित खेलत। जलखग कूजत मृदुबानी बोलत॥
Chaupai 16
जा पर कृपा दृष्टि बरसावें। प्रेम को भेद सोई जन पावें॥
Chaupai 17
नाम यमुना जब मुख पे आवें। सबहि अमगंल देखि टरि जावें॥
Chaupai 18
भजे नाम यमुना अमृत रस। रहे साँवरो सदा ताहि बस॥
Chaupai 19
करूणामयी सकल रसखानि। सुर नर मुनि बंदहि सब ज्ञानी॥
Chaupai 20
भूतल प्रकटी अवतार जब लीन्हो। उध्दार सभी भक्तन को किन्हो॥
Chaupai 21
शेष गिरा श्रुति पार न पावत। योगी जति मुनी ध्यान लगावत॥
Chaupai 22
दंड प्रणाम जे आचमन करहि। नासहि अघ भवसिंधु तरहि॥
Chaupai 23
भाव भक्ति से नीर न्हावें। देव सकल तेहि भाग्य सरावें॥
Chaupai 24
करि ब्रज वास निरंतर ध्यावहि। परमानंद परम पद पावहि॥
Chaupai 25
संत मुनिजन मज्जन करहि। नव भक्तिरस निज उर भरहि॥
Chaupai 26
पूजा नेम चरण अनुरागी। होई अनुग्रह दरश बड़भागी॥
Chaupai 27
दीपदान करि आरती करहि। अन्तर सुख मन निर्मल रहहि॥
Chaupai 28
कीरति विशद विनय करी गावत। सिध्दि अलौकिक भक्ति पावत॥
Chaupai 29
बड़े प्रेम श्रीयमुना पद गावें। मोहन सन्मुख सुनन को आवें॥
Chaupai 30
आतुर होय शरणागत आवें। कृपाकरी ताहि बेगि अपनावें॥
Chaupai 31
ममतामयी सब जानहि मन की। भव पीड़ा हरहि निज जन की॥
Chaupai 32
शरण प्रतिपाल प्रिय कुंजेश्वरी। ब्रज उपमा प्रीतम प्राणेश्वरी॥
Chaupai 33
श्रीजी यमुना कृपा जब होई। ब्रह्म सम्बन्ध जीव को होई॥
Chaupai 34
पुष्टिमार्गी नित महिमा गावैं। कृष्ण चरण नित भक्ति दृढावैं॥
Chaupai 35
नमो नमो श्री यमुने महारानी। नमो नमो श्रीपति पटरानी॥
Chaupai 36
नमो नमो यमुने सुख करनी। नमो नमो यमुने दु:ख हरनी॥
Chaupai 37
नमो कृष्णायैं सकल गुणखानी। श्रीहरिप्रिया निकुंज निवासिनी॥
Chaupai 38
करूणामयी अब कृपा कीजैं। फदंकाटी मोहि शरण मे लीजैं॥
Chaupai 39
जो यमुना चालिसा नित गावैं। कृपा प्रसाद ते सब सुख पावैं॥
Chaupai 40
ज्ञान भक्ति धन कीर्ति पावहि। अंत समय श्रीधाम ते जावहि॥
Closing
Doha 1
भज चरन चित सुख करन, हरन त्रिविध भव त्रास। भक्ति पाई आनंद रमन, कृपा दृष्टि ब्रज वास॥
Doha 2
यमुना चालिसा नित नेम ते, पाठ करे मन लाय। कृष्ण चरण रति भक्ति दृढ, भव बाधा मिट जाय॥