Shri Raghava Ashtakam 2
Ashtakam
1
कमललोचनौ काञ्चनाम्बरौ कवचभूषणौ कार्मुकान्वितौ। कलुषसंहरौ कामितप्रदौ रहसि नौमि तौ रामलक्ष्मणौ॥
2
धृतशिखण्डिनौ दीनरक्षकौ धृतिहिमाचलौ दिव्यविग्रहौ। दिविजपूजितौ दीर्घदोर्युगौ रहसि नौमि तौ रामलक्ष्मणौ॥
3
पवनजानुगौ पादचारिणौ पटुशिलीमुखौ पावनाङ्घ्रिकौ। परमसात्त्विकौ भक्तवत्सलौ रहसि नौमि तौ रामलक्ष्मणौ॥
4
वनविहारिणौ वल्कलाम्बरौ वनफलाशिनौ वासवस्तुतौ। वरगुणाकरौ वानरार्चितौ रहसि नौमि तौ रामलक्ष्मणौ॥
5
घनतटिन्निभौ खड्गधारिणौ घनजटाम्बरौ खण्डितव्यथौ। करशिलीमुखौ खरकरप्रभौ रहसि नौमि तौ रामलक्ष्मणौ॥
6
सवनरक्षकौ सत्यसङ्गरौ समरभीकरौ साहसान्वितौ। सदयमानसौ सर्वपूजितौ रहसि नौमि तौ रामलक्ष्मणौ॥
7
मकरकुण्डलौ मौनिसेवितौ मनुकिरीटिनौ मानुषोत्तमौ। मनुकुलेश्वरौ मञ्जुभाषिणौ रहसि नौमि तौ रामलक्ष्मणौ॥
8
वरगुणास्पदं राघवाष्टकं रहसि यः पठेद्रामभक्तिदम्। रहितकल्मषं रामसन्निधौ रविसमप्रभो राजते सदा॥