Dattatreya Chalisa
Opening
Doha 1
अत्रि अनुसूया नन्दन, त्रिमूर्ति अवतार। दत्तात्रेय प्रभु चरणन में, करूँ बारम्बार प्रणाम॥
Doha 2
ज्ञान वैराग्य के सागर, दिगम्बर अवधूत। शरण तुम्हारी आया हूँ, हरो सकल भव-भूत॥
Chaupai
Chaupai 1
जयति जयति दत्तात्रेय दयाला। आदिगुरु जग के प्रतिपाला॥
Chaupai 2
ब्रह्मा विष्णु शिव त्रय अवतारा। एक देह में रूप अपारा॥
Chaupai 3
अत्रि ऋषि के प्रिय अनुज नाथा। अनुसूया माता सुविख्याता॥
Chaupai 4
तीन शीश षट् भुज सुखकारी। दिगम्बर रूप अनुपम धारी॥
Chaupai 5
दाहिन हाथ त्रिशूल कमंडल। रुद्राक्षमाल शोभित मंगल॥
Chaupai 6
बाम भुज चक्र शंख सुशोभे। देखत रूप सुर नर मन मोहे॥
Chaupai 7
चार कुत्ते चारों वेद जानो। कामधेनु संग विराजत मानो॥
Chaupai 8
भस्म रमाये जटाजूट धारी। अवधूत अनघ महिमा भारी॥
Chaupai 9
चौबीस गुरु जग से सीखा ज्ञाना। पृथ्वी जल वायु से पाया माना॥
Chaupai 10
सूर्य चंद्र आकाश महासागर। मधुमक्खी अजगर चातक चंचल॥
Chaupai 11
राजा यदु को उपदेश दीन्हा। उद्धव गीता का ज्ञान अर्पिन्हा॥
Chaupai 12
श्रीमद् भागवत में लीला गाई। आदिगुरु की महिमा अकथनी भाई॥
Chaupai 13
परशुराम को विद्या दीन्हीं। कार्तवीर्य अर्जुन की सिद्धि लीन्हीं॥
Chaupai 14
सहस्रार्जुन हो भक्त मनाया। दत्त प्रभु ने मोक्ष-पथ दिखाया॥
Chaupai 15
पितृ दोष जिनको जग सतावे। दत्त नाम लेत दुख मिट जावे॥
Chaupai 16
काल सर्प दोष भी हरते स्वामी। भक्त जनों के अन्तर्यामी॥
Chaupai 17
शनि राहु केतु के पीड़ित जन। दत्त शरण लें होय शान्त मन॥
Chaupai 18
गुरुवार को पाठ जो नित्य करे। जीवन के सब संकट से उबरे॥
Chaupai 19
अवधूतगीता सार तुम्ही हो। जीवन्मुक्त स्वरूप तुम्ही हो॥
Chaupai 20
त्रिपुरा रहस्य ज्ञान-धाम। दत्त प्रभु तेरा ही नाम॥
Chaupai 21
भिक्षा माँग औदुम्बर वृक्ष तले। दत्त दर्शन से भव-बाधा टले॥
Chaupai 22
सात वार परिक्रमा जो करे। दत्त प्रसाद सहज उसे मिले॥
Chaupai 23
माँ अनुसूया ने तप कर पाया। त्रिदेव शिशु रूप में घर आया॥
Chaupai 24
ब्रह्मा-हरि-हर एक हो गये। दत्त नाम से जग में छा गये॥
Chaupai 25
रोग शोक दुख भय सब हारे। दत्त नाम लेत भक्त उबारे॥
Chaupai 26
जो नर इस चालीसा को गावे। दत्तात्रेय की कृपा वह पावे॥
Chaupai 27
जय जय जय दत्त दिगम्बर स्वामी। जय त्रिमूर्ति जय अन्तर्यामी॥
Chaupai 28
दत्त चालीसा नित जो पढ़े। ज्ञान-मुक्ति-भक्ति सदा बढ़े॥
Closing
Doha 1
दत्त चालीसा जो पढ़े, प्रेम सहित नित रोज। पितृ दोष हरि मुक्ति दे, खुले ज्ञान के रोज॥
Doha 2
अत्रि-नन्दन दत्त प्रभु, करहु कृपा अपार। भक्त जनों को मोक्ष दो, उतरें भव से पार॥