Jayati Shankara Aarti

Aarti

1

जयति जयति जग-निवास, शंकर सुखकारी ॥

2

अजर अमर अज अरूप, सत चित आनंदरूप, व्यापक ब्रह्मस्वरूप, भव! भव-भय-हारी ॥ जयति०॥

3

शोभित बिधुबाल भाल, सुरसरिमय जटाजाल, तीन नयन अति विशाल, मदन-दहन-कारी ॥ जयति०॥

4

भक्तहेतु धरत शूल, करत कठिन शूल फूल, हियकी सब हरत हूल, अचल शान्तिकारी ॥ जयति०॥

5

अमल अरुण चरण कमल, सफल करत काम सकल, भक्ति-मुक्ति देत विमल, माया-भ्रम-टारी ॥ जयति०॥

6

कार्तिकेययुत गणेश, हिमतनया सह महेश, राजत कैलास-देश, अकल कलाधारी ॥ जयति०॥

7

भूषण तन भूति व्याल, मुण्डमाल कर कपाल, सिंह-चर्म हस्ति खाल, डमरू कर धारी ॥ जयति०॥

8

अशरण जन नित्य शरण, आशुतोष आर्तिहरण, सब बिधि कल्याण-करण, जय जय त्रिपुरारी ॥ जयति०॥