Vishwakarma Chalisa
Opening
Doha 1
मनु मय त्वष्टा विश्वकर्मा, शिल्प कर्म आधार। तीन लोक चौदह भुवन, करनी का विस्तार॥
Doha 2
प्रत्न सुपर्ण महाराज, सनग सनातन अहिभून। शिल्पन के सरताज, आदि शिल्प के गुरु तुम॥
Chaupai
Chaupai 1
जगत गुरु जग ईश पियारे। विश्वकर्मा महाराज हमारे॥
Chaupai 2
देव दनुज सबके दुख टारे। दीनन के तुम हो रखवारे॥
Chaupai 3
जल, थल, पर्वत और अकाशा। चान्द सूर्य नित करहिं प्रकाशा॥
Chaupai 4
नाथ तुम्हारी अद्भुत करनी। महिमा अमित जाहि नहिं बरनी॥
Chaupai 5
सृष्टि आदि कर्ता हो स्वामी। बार बार है तुम्हें नमामी॥
Chaupai 6
भव निधि पड़े बहुत दुख पाये। सब तजि शरन तुम्हारी आये॥
Chaupai 7
जप तप भजन न होय गोसाईम्। बन्धे कीट मर्कट की नाईम्॥
Chaupai 8
बन्धन छोर हमें अपनाओ। निज चरणों का दास बनाओ॥
Chaupai 9
जयति जयति विश्वकर्मा स्वामी। मम उर बसहु नाथ विज्ञानी॥
Chaupai 10
सुमिरन भजन तुम्हारा भावै। बुरे कर्म से मन हट जावै॥
Chaupai 11
साधु सन्त के तुम रखवारे। भक्त जनन के प्राण पियारे॥
Chaupai 12
स्वारथ वश तब भक्ति बिसारी। नाथ पड़ा हूं शरण तुम्हारी॥
Chaupai 13
तुमहिं भजै अक्षय सुख पावै। जन्म जन्म के दुःख बिनसावै॥
Chaupai 14
पुरवहु नाथ मनोरथ मोरा। मन क्रम वचन दास मैं तोरा॥
Chaupai 15
एक लालसा यही हमारी। केवल भक्ती चहौं तिहारी॥
Chaupai 16
मङ्गल करन अमङ्गल हारी। त्रिभुवन महिमा विदित तुम्हारी॥
Chaupai 17
आरत-हरण भक्त भय हारी। शरण शरण मैं शरण तिहारी॥
Chaupai 18
तुम सबके गुरु सबके स्वामी। तुम सबहीं के अन्तरवामी॥
Chaupai 19
सर्व शक्ति तुम सब आधारा। तुमहिं भजै सो उतरहिं पारा॥
Chaupai 20
घट घट माहिं तुम्हारो बासा। सर्व ठौर जिमि दीप प्रकाशा॥
Chaupai 21
यह विधि तुमको जानै कोई। भक्त अरु जानी कहिए सोई॥
Chaupai 22
जगत पिता तुमहीं हो ईशा। याते हम विनवत जगदीशा॥
Chaupai 23
नाथ कृपा अब हम पर कीजै। भक्ति आपनी हमको दीजै॥
Chaupai 24
प्रेम भक्ति बिनु कृपा न होई। सर्व शास्त्र में देखै जोई॥
Chaupai 25
कर्म योग कर सेवत कोई। ज्यों सेदै त्यों ही गति होई॥
Chaupai 26
जो हरि ज्योति आप प्रगटाई। घर घर में सोई दरशाई॥
Chaupai 27
तुम सब ठौर सबन ते न्यारे। को लखि सके चरित्र तुम्हारे॥
Chaupai 28
तुम सबके प्रभु अन्तरयामी। जीव बिसर रहे तुमको स्वामी॥
Chaupai 29
विश्वकर्मा को जो कोई ध्यावै। होय मुक्ति जीवन फल पावै॥
Chaupai 30
डूब न जावे नाव हमारी। हम आये हैं शरण तुम्हारी॥
Chaupai 31
हम सेवक हैं नाथ तुम्हारे। भव सागर से करौ किनारे॥
Chaupai 32
सुत पितु मातु न कोई सङ्घाती। सब तजि भजन करहुं दिन राती॥
Chaupai 33
दीनबन्धु दीनन हितकारी। शरण पड़ा हूं नाथ तुम्हारी॥
Chaupai 34
विश्वकर्मा ही ब्रह्म कहावै। विश्वकर्मा सब सृष्टि रचावै॥
Chaupai 35
पढ़ै जो विश्वकर्मा चालीसा। सुफल काज हों बीसों बीसा॥
Chaupai 36
चालिस दिन जो ध्यान लगावै। राजद्रोह से मुक्ति पावै॥
Chaupai 37
भूत प्रेत नहिं उनहिं सतावै। चालीसा में जो मन लावै॥
Chaupai 38
धूप देय अरु जपै हमेशा। फिर नहिं पावै दुःख लवलेशा॥
Chaupai 39
जो कोई अक्षत पुष्प चढ़ावे। होय मुक्त जग फिर नहिं आवै॥
Chaupai 40
उसके जीवन का रखवारा। रहे नित्य विश्वकर्मा प्यारा॥
Chaupai 41
सकल पदारथ करतल ताके। बसै ह्रदय विश्वकर्मा जाके॥
Closing
Doha 1
आदि सृष्टि आधार तुम, रचना विविध प्रकार। नाथ तुम्हारी कृपा बिन, केहि विधि उतरूं पार॥
Doha 2
हाथ जोड़ विनती करूं, धरुं चरण माथ। पूर्ण होय मम कामना, यह वर दीजै कर्तार॥