Sankata Chalisa
Opening
Doha
जगत जननि जगदम्बिके, अरज सुनहु अब मोर। बंदौ पद-युग नाइ सिर, विनय करों कर जोर॥
Chaupai
Chaupai 1
जय जय जय संकटा भवानी, कृपा करहु मो पर महारानी। हाथ खड्ग भृकुटि विकराला, अरुण नयन गल में मुण्डमाला॥
Chaupai 2
कानन कुण्डल की छवि भारी, हिय हुलसे मन होत सुखारी। केहरि वाहन है तव माता, कष्ट निवारो जन जन त्राता॥
Chaupai 3
आयऊं शरण तिहारी अम्बे, अभय करहु मोको जगदम्बे। शरण आई जो तुमहिं पुकारा, बिन बिलम्ब तुम ताहि उबारा॥
Chaupai 4
भीर पड़ी भक्तन पर जब-जब, किया सहाय मात तुम तब-तब। रक्तबीज दानव तुम मारे, शुंभ-निशुंभ के उदर विदारे॥
Chaupai 5
महिसासुर नृप अति बलबीरा, मारे मरे न अति रणधीरा। करि संग्राम सकल सुर हारे, अस्तुति करी तुम तुमहिं पुकारे॥
Chaupai 6
प्रगटेउ काली रूप में माता, सेन सहित तुम ताहि निपाता। तेहि के बध सब देव हरषे, नभ दुंदुभी सुमन बहु बरसे॥
Chaupai 7
रक्षा करहु दीन जन जानी, जय जय जगदंब भवानी। सब जीवों की हो प्रतिपालक, जय जग जननी दनुज कुल घालक॥
Chaupai 8
सकल सुमन की जीवन दाता, संकट हरो हमारी माता। संकट नाशक नाम तुम्हारा, सुयश तुम्हार सकल संसारा॥
Chaupai 9
सुर नर नाग असुर मुनि जेते, गावत गुण गान निश दिन तेते। योगी निशिवासर तब ध्यावहिं, तदपि तुम्हार अंत न पावहिं॥
Chaupai 10
अतुल तेज मुख पर छवि सोहै, निरखि सकल सुर नर मुनि मोहै। चरण कमल मैं शीश झुकाऊं, पाहि पाहि कहि नितहि मनाऊं॥
Chaupai 11
नेति-नेति कहा वेद बखाना, शक्ति स्वरुप तुम्हार न जाना। मैं मूरख किमि कहौं बखानी, नाम तुम्हारा अनेक भवानी॥
Chaupai 12
सुमिरत नाम कटै दुःख भारी, सत्य वात यह वेद उचारी। नाम तुम्हार लेत जो कोई, ताकौ भय संकट नहीं होई॥
Chaupai 13
संकट आय परै जो कबहिं, नाम लेत बिनसत हैं तबहिं। प्रेम सहित जो जपे हमेशा, ताके तन नहि रहे कलेशा॥
Chaupai 14
शरणगत होई जो जन आवैं, मनवांछित फल तुरतहि पावै। रणचंडी वन असुर संहारा, बंधन काटि कियौ छुटकारा॥
Chaupai 15
नाम सकल कलि कलुष नसावन, सुमिरत सिद्ध होय नर पावन। षोड्श पूजन करे जो कोई, इच्छित फल पावै नर सोई॥
Chaupai 16
जो नारी सिंदूर चढ़ावे, तासु सोहाग अचल हो जावै। पुत्र हेतु जो पूजा करहिं, सन्तति-सुख निश्चय सो लहहिं॥
Chaupai 17
और कामना करे जो कोई, ताके घर सुख संपत्ति होई। निर्धन नर जो शरण में आवै, सो निश्चय धनवान कहावै॥
Chaupai 18
रोगी रोग मुक्त होइ जावै, तब चरणन को ध्यान लगावै। सब सुख खानि तुमारि पूजा, एहि सम और उपाय न दूजा॥
Chaupai 19
पार करे संकटा चालीसा, तेहि पर कृपा करहिं गौरीसा। पाठ करें अरु सुनै सुनावै, वाकौ सब संकट मिटि जावे॥
Chaupai 20
कहां तक महिमा कहौं तुम्हारी, हरहू बेगि मोहि संकट भारी। मम कारज सब पूरन किजे, दीन जनि मोहिं अभय कर दीजे॥
Chaupai 21
तोहि विनय करूं मैं बारम्बारा, छमहूँ सकल अपराध हमारा।॥
Closing
Doha 1
मातु संकटा नाम तब, संकट हरहु हमार। होइ प्रसन्न निज दास पर, लीजै मोहिं उबार॥
Doha 2
सन्तशरण को तनय हूँ, शिवदत मिश्र सुनाम। देवरिया मण्डल बसूँ, धाम मझौली ग्राम॥
Doha 3
रचेउँ चालीसा नाइ सिर, तुम्हरो है अवलम्ब। मार्गशीर्ष की पूर्णिमा, कृपा करहु जगदम्ब॥