Lalita Chalisa

Chaupai

Chaupai 1

जयति जयति जय ललिते माता। तव गुण महिमा है विख्याता॥

Chaupai 2

तू सुन्दरी, त्रिपुरेश्वरी देवी। सुर नर मुनि तेरे पद सेवी॥

Chaupai 3

तू कल्याणी कष्ट निवारिणी। तू सुख दायिनी, विपदा हारिणी॥

Chaupai 4

मोह विनाशिनी दैत्य नाशिनी। भक्त भाविनी ज्योति प्रकाशिनी॥

Chaupai 5

आदि शक्ति श्री विद्या रूपा। चक्र स्वामिनी देह अनूपा॥

Chaupai 6

हृदय निवासिनी-भक्त तारिणी। नाना कष्ट विपति दल हारिणी॥

Chaupai 7

दश विद्या है रुप तुम्हारा। श्री चन्द्रेश्वरी नैमिष प्यारा॥

Chaupai 8

धूमा, बगला, भैरवी, तारा। भुवनेश्वरी, कमला, विस्तारा॥

Chaupai 9

षोडशी, छिन्न्मस्ता, मातंगी। ललितेशक्ति तुम्हारी संगी॥

Chaupai 10

ललिते तुम हो ज्योतित भाला। भक्त जनों का काम संभाला॥

Chaupai 11

भारी संकट जब-जब आये। उनसे तुमने भक्त बचाए॥

Chaupai 12

जिसने कृपा तुम्हारी पायी। उसकी सब विधि से बन आयी॥

Chaupai 13

संकट दूर करो माँ भारी। भक्त जनों को आस तुम्हारी॥

Chaupai 14

त्रिपुरेश्वरी, शैलजा, भवानी। जय जय जय शिव की महारानी॥

Chaupai 15

योग सिद्दि पावें सब योगी। भोगें भोग महा सुख भोगी॥

Chaupai 16

कृपा तुम्हारी पाके माता। जीवन सुखमय है बन जाता॥

Chaupai 17

दुखियों को तुमने अपनाया। महा मूढ़ जो शरण न आया॥

Chaupai 18

तुमने जिसकी ओर निहारा। मिली उसे सम्पत्ति, सुख सारा॥

Chaupai 19

आदि शक्ति जय त्रिपुर प्यारी। महाशक्ति जय जय, भय हारी॥

Chaupai 20

कुल योगिनी, कुण्डलिनी रूपा। लीला ललिते करें अनूपा॥

Chaupai 21

महा-महेश्वरी, महा शक्ति दे। त्रिपुर-सुन्दरी सदा भक्ति दे॥

Chaupai 22

महा महा-नन्दे कल्याणी। मूकों को देती हो वाणी॥

Chaupai 23

इच्छा-ज्ञान-क्रिया का भागी। होता तब सेवा अनुरागी॥

Chaupai 24

जो ललिते तेरा गुण गावे। उसे न कोई कष्ट सतावे॥

Chaupai 25

सर्व मंगले ज्वाला-मालिनी। तुम हो सर्व शक्ति संचालिनी॥

Chaupai 26

आया माँ जो शरण तुम्हारी। विपदा हरी उसी की सारी॥

Chaupai 27

नामा कर्षिणी, चिन्ता कर्षिणी। सर्व मोहिनी सब सुख-वर्षिणी॥

Chaupai 28

महिमा तव सब जग विख्याता। तुम हो दयामयी जग माता॥

Chaupai 29

सब सौभाग्य दायिनी ललिता। तुम हो सुखदा करुणा कलिता॥

Chaupai 30

आनन्द, सुख, सम्पत्ति देती हो। कष्ट भयानक हर लेती हो॥

Chaupai 31

मन से जो जन तुमको ध्यावे। वह तुरन्त मन वांछित पावे॥

Chaupai 32

लक्ष्मी, दुर्गा तुम हो काली। तुम्हीं शारदा चक्र-कपाली॥

Chaupai 33

मूलाधार, निवासिनी जय जय। सहस्रार गामिनी माँ जय जय॥

Chaupai 34

छः चक्रों को भेदने वाली। करती हो सबकी रखवाली॥

Chaupai 35

योगी, भोगी, क्रोधी, कामी। सब हैं सेवक सब अनुगामी॥

Chaupai 36

सबको पार लगाती हो माँ। सब पर दया दिखाती हो माँ॥

Chaupai 37

हेमावती, उमा, ब्रह्माणी। भण्डासुर कि हृदय विदारिणी॥

Chaupai 38

सर्व विपति हर, सर्वाधारे। तुमने कुटिल कुपंथी तारे॥

Chaupai 39

चन्द्र- धारिणी, नैमिश्वासिनी। कृपा करो ललिते अधनाशिनी॥

Chaupai 40

भक्त जनों को दरस दिखाओ। संशय भय सब शीघ्र मिटाओ॥

Chaupai 41

जो कोई पढ़े ललिता चालीसा। होवे सुख आनन्द अधीसा॥

Chaupai 42

जिस पर कोई संकट आवे। पाठ करे संकट मिट जावे॥

Chaupai 43

ध्यान लगा पढ़े इक्कीस बारा। पूर्ण मनोरथ होवे सारा॥

Chaupai 44

पुत्र-हीन संतति सुख पावे। निर्धन धनी बने गुण गावे॥

Chaupai 45

इस विधि पाठ करे जो कोई। दुःख बन्धन छूटे सुख होई॥

Chaupai 46

जितेन्द्र चन्द्र भारतीय बतावें। पढ़ें चालीसा तो सुख पावें॥

Chaupai 47

सबसे लघु उपाय यह जानो। सिद्ध होय मन में जो ठानो॥

Chaupai 48

ललिता करे हृदय में बासा। सिद्दि देत ललिता चालीसा॥

Closing

Doha

ललिते माँ अब कृपा करो, सिद्ध करो सब काम। श्रद्धा से सिर नाय करे, करते तुम्हें प्रणाम॥