Bholenath Aarti
Aarti
1
अभयदान दीजै दयालु प्रभु सकल सृष्टिके हितकारी । भोलेनाथ भक्त-दुखगंजन भवभंजन शुभ सुखकारी ॥
2
दीनदयालु कृपालु कालरिपु अलखनिरंजन शिव योगी । मंगल रूप अनूप छबीले अखिल भुवनके तुम भोगी ॥
3
बाम अंग अति रँगरस-भीने उमा-वदनकी छबि न्यारी । भोलेनाथ भक्त-दुखगंजन भवभंजन शुभ सुखकारी ॥
4
असुर-निकंदन सब दुखभंजन वेद बखाने जग जाने । रुण्ड-माल गल व्याल भाल-शशि नीलकंठ शोभा साने ॥
5
गंगाधर त्रिशूलधर विषधर बाघम्बरधर गिरिचारी । भोलेनाथ भक्त-दुखगंजन भवभंजन शुभ सुखकारी ॥
6
यह भवसागर अति अगाध है पार उतर कैसे बूझै । ग्राह मगर बहु कच्छप छाये मार्ग कहो कैसे सूझै ॥
7
नाम तुम्हारा नौका निर्मल तुम केवट शिव अधिकारी । भोलेनाथ भक्त-दुखगंजन भवभंजन शुभ सुखकारी ॥
8
मैं जानूँ तुम सद्गुणसागर अवगुण मेरे सब हरियो । किंकरकी विनती सुन स्वामी सब अपराध क्षमा करियो ॥
9
तुम तो सकल विश्वके स्वामी मैं हूँ प्राणी संसारी । भोलेनाथ भक्त-दुखगंजन भवभंजन शुभ सुखकारी ॥
10
काम-क्रोध-लोभ अति दारुण इनसे मेरो वश नाहीं । द्रोह-मोह-मद संग न छोड़े आन देत नहिं तुम ताँई ॥
11
क्षुधा-तूषा नित लगी रहत है बढ़ी विषय तृष्णा भारी । भोलेनाथ भक्त-दुखगंजन भवभंजन शुभ सुखकारी ॥
12
तुम ही शिवजी कर्ता हर्ता तुम ही जगके रखवारे । तुम ही गगन मगन पुनि पृथिवी पर्वतपुत्रीके प्यारे ॥
13
तुम ही पवन हुताशन शिवजी तुम ही रवि-शशि तमहारी । भोलेनाथ भक्त-दुखगंजन भवभंजन शुभ सुखकारी ॥
14
पशुपति अजर अमर अमरेश्वर योगेश्वर शिव गोस्वामी । वृषभारूढ़ गूढ़ गुरु गिरिपति गिरिजावल्लभ निष्कामी ॥
15
सुषमासागर रूप उजागर गावत हैं सब नर-नारी । भोलेनाथ भक्त-दुखगंजन भवभंजन शुभ सुखकारी ॥
16
महादेव देवोंके अधिपति फणिपति-भूषण अति साजै । दीप्त ललाट लाल दोउ लोचन उर आनत ही दुख भाजै ॥
17
परम प्रसिद्ध पुनीत पुरातन महिमा त्रिभुवन-विस्तारी । भोलेनाथ भक्त-दुखगंजन भवभंजन शुभ सुखकारी ॥
18
ब्रह्मा-विष्णु-महेश-शेष मुनि-नारद आदि करत सेवा । सबकी इच्छा पूरन करते नाथ सनातन हर देवा ॥
19
भक्ति-मुक्तिके दाता शंकर नित्य-निरंतर सुखकारी । भोलेनाथ भक्त-दुखगंजन भवभंजन शुभ सुखकारी ॥
20
महिमा इष्ट महेश्वरको जो सीखे सुने नित्य गावै । अष्टसिद्धि-नवनिधि सुखसम्पति स्वामिभक्ति मुक्ती पावै ॥
21
श्रीअहिभूषण प्रसन्न होकर कृपा कीजिये त्रिपुरारी । भोलेनाथ भक्त-दुखगंजन भवभंजन शुभ सुखकारी ॥