Shri Mangirishashtakam

Ashtakam

1

विश्वेश्वर प्रणत दुःखविनाशकारिन् सर्वेष्टपूरक परात्परपापहारिन्। कुन्देन्दुशङ्खधवलश्रुतिगीतकीर्ते भो माङ्गिरीश तव पादयुगं नमामि॥

2

गङ्गाधर स्वजनपालनशोकहारिन् शक्रादिसंस्तुतगुण प्रमथाधिनाथ। खण्डेन्दुशेखर सुरेश्वर भव्यमूर्ते भो माङ्गिरीश तव पादयुगं नमामि॥

3

त्रैलोक्यनाथ मदनान्तक शूलपाणे पापौघनाशनपटो परमप्रतापिन्। लोमेशविप्रवरदायक कालशत्रो भो माङ्गिरीश तव पादयुगं नमामि॥

4

भो भूतनाथ भवभञ्जन सर्वसाक्षिन् मृत्युञ्जयान्धकनिषूदन विश्वरूप। भो सङ्गमेश्वर सदाशिव भालनेत्र भो माङ्गिरीश तव पादयुगं नमामि॥

5

अम्भोजसम्भव-रमापति -पूजिताङ्घ्रे यक्षेन्द्रमित्र करुणामयकाय शम्भो। विद्यानिधे वरद दीनजनैकबन्धो भो माङ्गिरीश तव पादयुगं नमामि॥

6

रुद्राक्षभूषिततनो मृगशावहस्त मोहान्धकारमिहिर श्रितभालनेत्र। गोत्राधरेन्द्र-तनयाङ्कित-वामभाग भो माङ्गिरीश तव पादयुगं नमामि॥

7

कैलासनाथ कलिदोष विनाशदक्ष धत्तूरपुष्प परमप्रिय पञ्चवक्त्र। श्रीवारिजाक्षकुलदैवत कामशत्रो भो माङ्गिरीश तव पादयुगं नमामि॥

8

योगीन्द्रहृत्कमलकोश सदानिवास ज्ञानप्रदायक शरण्य दुरन्तशक्ते। यज्ञेशयज्ञफलदायक यज्ञमूर्ते भो माङ्गिरीश तव पादयुगं नमामि॥

9

ये माङ्गिरीश-चरण-स्मरणानुरक्तां माङ्गीश्वराष्टकमिदं सततं पठन्ति। तेऽमुष्मिकं सकल सौख्यमपीह भुक्त्वा देहान्तकालसमये शिवतां व्रजन्ति॥

10

भो माङ्गिरीश तव पादयुगं नमामि॥