Veerabhadra Chalisa
Opening
Doha 1
वन्दो वीरभद्र शरणों शीश नवाओ भ्रात। ऊठकर ब्रह्ममुहुर्त शुभ कर लो प्रभात॥
Doha 2
ज्ञानहीन तनु जान के भजहौंह शिव कुमार। ज्ञान ध्यान देही मोही देहु भक्ति सुकुमार॥
Chaupai
Chaupai 1
जय-जय शिव नन्दन जय जगवन्दन। जय-जय शिव पार्वती नन्दन॥
Chaupai 2
जय पार्वती प्राण दुलारे। जय-जय भक्तन के दु:ख टारे॥
Chaupai 3
कमल सदृश्य नयन विशाला। स्वर्ण मुकुट रूद्राक्षमाला॥
Chaupai 4
ताम्र तन सुन्दर मुख सोहे। सुर नर मुनि मन छवि लय मोहे॥
Chaupai 5
मस्तक तिलक वसन सुनवाले। आओ वीरभद्र कफली वाले॥
Chaupai 6
करि भक्तन सँग हास विलासा। पूरन करि सबकी अभिलासा॥
Chaupai 7
लखि शक्ति की महिमा भारी। ऐसे वीरभद्र हितकारी॥
Chaupai 8
ज्ञान ध्यान से दर्शन दीजै। बोलो शिव वीरभद्र की जै॥
Chaupai 9
नाथ अनाथों के वीरभद्रा। डूबत भँवर बचावत शुद्रा॥
Chaupai 10
वीरभद्र मम कुमति निवारो। क्षमहु करो अपराध हमारो॥
Chaupai 11
वीरभद्र जब नाम कहावै। आठों सिद्घि दौडती आवै॥
Chaupai 12
जय वीरभद्र तप बल सागर। जय गणनाथ त्रिलोग उजागर॥
Chaupai 13
शिवदूत महावीर समाना। हनुमत समबल बुद्घि धामा॥
Chaupai 14
दक्षप्रजापति यज्ञ की ठानी। सदाशिव बिन सफल यज्ञ जानी॥
Chaupai 15
सति निवेदन शिव आज्ञा दीन्ही। यज्ञ सभा सति प्रस्थान कीन्ही॥
Chaupai 16
सबहु देवन भाग यज्ञ राखा। सदाशिव करि दियो अनदेखा॥
Chaupai 17
शिव के भाग यज्ञ नहीं राख्यौ। तत्क्षण सती सशरीर त्यागो॥
Chaupai 18
शिव का क्रोध चरम उपजायो। जटा केश धरा पर मार्यो॥
Chaupai 19
तत्क्षण टँकार उठी दिशाएँ। वीरभद्र रूप रौद्र दिखाएँ॥
Chaupai 20
कृष्ण वर्ण निज तन फैलाए। सदाशिव सँग त्रिलोक हर्षाए॥
Chaupai 21
व्योम समान निज रूप धर लिन्हो। शत्रुपक्ष पर दऊ चरण धर लिन्हो॥
Chaupai 22
रणक्षेत्र में ध्वँस मचायो। आज्ञा शिव की पाने आयो॥
Chaupai 23
सिंह समान गर्जना भारी। त्रिमस्तक सहस्र भुजधारी॥
Chaupai 24
महाकाली प्रकटहु आई। भ्राता वीरभद्र की नाई॥
Closing
Doha
आज्ञा ले सदाशिव की चलहुँ यज्ञ की ओर। वीरभद्र अरू कालिका टूट पडे चहुँ ओर॥