Sharada Aarti
Aarti
1
शारदे ओ विशारदे दुख विनाशिनी शारदे ज्योति स्वरूपिणी शारदे आत्म स्वरूपिणि शारदे ॥
2
ज्योति स्वरूपिणि अम्बे माँ आत्म स्वरूपिणि अम्बे माँ दुर्गे माँ ऽ ऽ ऽ अम्बे माँ ऽ ऽ ऽ ॥
3
ज्योति से ज्योति जगा मेरे राम ज्योति से ज्योति जगा दो । अब भक्ति की ज्योति जगा मेरे राम शक्ति की ज्योति जगा दो ॥
4
अब ज्ञान की ज्योति जगा मेरे राम ध्यान की ज्योति जगा दो । अब अपनी ज्योति जगा मेरे राम ज्योति से ज्योति जगा दो ॥