Hari Kar Deepak Aarti

Aarti

1

हरि कर दीपक, बजावें संख सुरपति, गनपति झाँझ, भैरों झालर झरत हैं । नारदके कर बीन, सारदा गावत जस, चारिमुख चारि वेद बिधि उचरत हैं ॥

2

षटमुख रटत ससहस्रमुख सिव सिव, सनक-सनंदनादि पाँयन परत हैं । बालकृष्ण तीनि लोक, तीस और तीनि कोटि, एते शिवशंकरकी आरति करत हैं ॥