Shri Vrishanandana Ashtakam

Ashtakam

1

(द्रुतविलम्बित वृत्तम्) वदनतर्जित-रम्य-हिमांशु के कमलकोमल-पत्रविलोचने। मदनमोहन-सुन्दर-विग्रहे भवहरेऽस्तु मनो वृषनन्दने॥

2

मुनिसमाज-सदासन-संस्थिते पुरटनूपुर-रम्यपदाम्बुजे। उदरनाभि-वलित्रय-राजिते भवहरेऽस्तु मनो वृषनन्दने॥

3

कुसुममाल-विशालभुजान्तरे मधुरहासविलास-मुखाम्बुजे। रुचिर-केसरचन्दन-चर्चिते भवहरेऽस्तु मनो वृषनन्दने॥

4

जघन-काञ्चन-भासुरमेखले ललितमौक्तिकहार-मनोहरे। कुटिल-मञ्जुलनील-शिरोरुहे भवहरेऽस्तु मनो वृषनन्दने॥

5

विशदचन्द्र-करप्रभ-शेखरे प्रणतपापविनाश-दिवाकरे। धृतवलक्ष-विशाल-घनाम्बरे भवहरेऽस्तु मनो वृषनन्दने॥

6

क्षपितभक्त-मनोभव-वेदने कनकभूषण-हारि-करद्वये। अरुणराग-शिरःपट-शोभिते भवहरेऽस्तु मनो वृषनन्दने॥

7

तिलकलक्षण-राजित-गण्डके श्रुतिसितेतर-बिन्दु-मनोहरे। श्रवणकुण्डल-शालि-कपोलके भवहरेऽस्तु मनो वृषनन्दने॥

8

मधुरवाक्य-सुधारस-पोषके निजजनोदित-योगरहस्यके। वदति संसदि कृष्ण-निरूपणं भवहरेऽस्तु मनो वृषनन्दने॥

9

श्री अचिन्न्यानन्दब्रह्मचारीविरचितं श्रीवृषनन्दनाष्टकं सम्पूर्णम् ।॥